अब्दुल मजीद दरियाबादी महान लेखक - मोहम्मद अहमद 




उन्नाव ।    दावतुल हक उमर सोसाइटी की बैठक हुई जिसमें अध्यक्ष मो0 अहमद ने कहा अब्दुल मजीद दरियाबादी एक महान मुस्लिम लेखक और कुरआन शरीफ के अनुवादक थे । ये खिलाफत आन्दोलन, रायल एशियाटिक सोसायटी - लंदन, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, नदवातुल उलमा लखनऊ और शिबली अकेडमी आजमगढ़ से ताल्लुक रखते थे । इन्होने कुरआन शरीफ का अंग्रज़ी में अनुवाद किया और उर्दू में तफसीर मजीदी लिखी । ये मौलाना अशरफ अली थानवी के शिष्य थे ।

इनका जन्म दरियाबाद के किदवई परिवार में हुआ था और इनके दादा मुफ्ती मजहर करीम को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ फतवा जारी करने के जुर्म में कालापानी की सजा हुई थी । इन्होंने फिलॉसफी से बी0ए0 ऑनर्स केनिंग कॉलेज, लखनऊ से किया और एम0ए0 करने के लिए दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कॉलेज गये परन्तु आर्थक तंगी की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर सके । इनके मिलने वालों में मुस्लिम विद्वान शिबली नोमानी, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, सैयद सुलेमान नदवी, मोहम्मद अली जौहर, अकबर इलाहाबादी शामिल थे ।

इनकी लिखी दर्जनों किताबों में कुरान द लाइख ऑफ प्रॉफेट मोहम्मद, फलसफा ए इज्तिमा, फलसफा ए जज्बात, मर्दों की सीमायें, मुहम्मद अली जाती डायरी, तफसीर ए कुरान, हकीम उल उम्मत, आप बीती, मुताला ए कुरानबीसवीं सदी में आदि शामिल हैं । 

इनका किदवई परिवार माडर्न इण्डिया के कुछ उच्च शिक्षित और विशिष्ट परिवारों में गिना जाता है । इनके ब्रदर इन लॉ शेख मसूदुज्जमां ब्रिटिश राज में यूनाईटेड प्राविंस की लेजिस्लेटिव काउंसिल के मेंबर थे । इनकी बहन हैदराबाद स्टेट के नवाब और हैदराबाद हाईकोर्ट के जज नाजिर यार जंग को ब्याही थीं । अब्दुल मजीद दरियाबादी की भांजी हमीदा अवध के सैदापुर तालुके के वजाहत हबीबुल्लाह की माँ थी और इनके दामाद डॉ0 हाशिम किदवई बहुत जाने माने विद्वान और राज्यसभा के एम.पी. थे । इनके नाती सलीम किदवई जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर और डॉ0 अब्दुल रहीम किदवई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अंग्रज़ी के प्रोफेसर हैं । जबकि तीसरे नाती डॉ0 शफी किदवई अलीगढञ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ही मास कम्यूनिकेशन के प्रोफेसर हैं और सबसे छोटे रसीद किदवई जाने माने राजनीतिक विशलेषक और पत्रकार हैं ।

इनके नाम से बेगमगंज, बाराबंकी में मौलाना अब्दुल मजीद दरियाबादी उर्दू लाइब्रेरी भी है । इनकी मौत 84 साल की उम्र में 6 जनवरी 1977 को बाराबंकी में हुई । 

शोएब, नफीस, दिलशाद, कमलेश कुमार रावत, मून, आसिफ हुसैन, संजय जायसवाल, मो0 आफाक, मो0 जाबिर, इकराम फरीदी, शवाब खान आदि लगभग एक सैकड़ा लोग उपस्थित थे ।