दिल्ली पब्लिक स्कूल बर्रा का वार्षिकोत्सव उमंग-2019 संपन्न


कानपुर।  दिल्ली पब्लिक स्कूल बर्रा, कानपुर में दिनांक 10 दिसम्बर 2019 को डी0 पी0 एस0 किदवई  नगर एवं डी0 पी0 एस0 बर्रा के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम 'उमंग' का आयोजन किया  गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त  छात्र/छात्राओं ने भारत की श्रेष्ठ, प्राचीन, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को पूरे उत्साह व उल्लास से प्रस्तुत किया। इस रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि विद्यालय की प्रो0 वाइस चेयर पर्सन श्रीमती बंदना मिश्रा की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में विद्यालय के संस्थापक श्री आलोक मिश्रा के साथ विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्य श्री देवव्रत मिश्रा भी उपस्थित रहे।
विद्यालय की निदेशिका व दिल्ली पब्लिक स्कूल आज़ाद नगर की प्रधानाचार्या श्रीमती रचना मोहोत्रा, उप प्रधानाचार्या श्रीमती पुनीता कपूर, आज़ाद नगर की मुख्याध्यापिका श्री सोनी भार्गव, डी0 पी0 एस0 सर्वोदय नगर की मुख्याध्यापिका श्रीमती प्रतिभा शुक्ला, डी0 पी0 एस0 किदवई नगर की प्रभारी श्रीमती अलका जोशी तथा नगर के संभ्रांत नागरिकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया। मुख्य अतिथि विद्यालय की प्रो0 वाइस चेयरपर्सन श्रीमती बंदना मिश्रा व संस्थापक श्री आलोक मिश्रा के साथ उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने ज्ञान के प्रतीक दीप का प्रज्ज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम 'उमंग' का शुभारम्भ किया।
वार्षिकोत्सव के शुभ अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या शिल्पा मनीश ने वार्षिक आख्या प्रस्तुत करने के साथ पधारे सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए सभी को विद्यालय के शैक्षिक व कलात्मक गतिविधियों से अवगत कराया। 
उमंग' 2019 का आगाज़ भारत के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक व सामाजिक धरोहर से हुआ। जिसके द्वारा सम्पूर्ण विश्व सदैव से ही भारत के प्रति आकर्षित रहा है। इसकी समृद्धता ही इसकी पहचान है।
रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ पवन पुत्र हनुमान की स्तुति से किया गया। समस्त संसार में अपनी भक्ति के लिए प्रसिद्ध बजरंगबली ज्ञान, बुद्धि व बल के स्वामी हैं। सभी अशुभ व अपवित्र शक्तियों का नाश करने वाले अंजनी नंदन की उपासना की अद्भुुत प्रस्तुति ने सभी को भक्ति भाव से अभिभूत कर दिया।
भारत का राजपुताना अपनी लोक संस्कृति, शैलियों जैसे- देश भक्ति व वीरता के लिए विख्यात रहा है। डी0 पी0 एस0 किदवई नगर के नौनिहालों ने राजस्थान की प्रमुख नृत्य शैलियों घूमर, कलबेलियाँ तथा कठपुतली की प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। 
जीवन में कविताओं व किस्से-कहानियों का रोमांच बचपन में ही सबसे अधिक होता है। डी0 पी0 एस0 बर्रा के नौनिहाल जब अपने जोशीले गीतों, नृत्यो व कविताओं के साथ मंच पर उतरे तो वहाँ बैठे सभी जन अपने बचपन की यादों में खो गए। उनके मन में भी बचपन की हिलोरें उठने लगीं।
संपूर्ण ब्रह्माण्ड में धरा ही ऐसा स्थल है जो अपार धन-धान्यो, संसाधनों, फल-फूलों तथा हरीतिमा की सुख-समृद्वि से परिपूर्ण है। विश्व के समस्त सुख इसी धरती पर विद्यमान है। वास्तविक स्वर्ग इस भू लोक पर ही हैं। मानव द्वारा इसके महत्व को समझने की आवष्यकता है। बुद्धिमान, वाकपटु तेनालीरामा पर आधारित नृत्य नाटिका 'स्वर्ग की खोज' की प्रस्तुति द्वारा धरा पर ही स्वर्ग के होने का संदेश दिया गया।
डी0 पी0 एस0 बर्रा के छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव प्रयत्नशील रहा है। इसी कड़ी में डी0 पी0 एस0 बर्रा के छात्रों ने कानपुर सहोदया अन्तरविद्यालयीय नृत्य प्रतियोगिता में भागीदारी कर अपनी शानदार प्रस्तृति से विजेता के पुरस्कार पर अपना अधिकार किया। 'उमंग' वार्षिकोत्सव में छात्र/छात्राओं ने उसी अफ्रीकन नृत्य शैली की मनमोहक प्रस्तुति से अद्भुत समा बाँध दिया। 
प्राचीन भारतीय संस्कृति मूल रूप से पंच महाभूतों की अवधारणा पर स्थित है पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु के संयोग से संसार की संरचना हुई। आज मानव ने धरा, जल, वायु सभी को इतना प्रदूशित कर दिया है कि जीवनदायक ये पंच महाभूत जीवन नाशक के रूप में परिणत हो गए हैं। वार्षिकोत्सव के मंच से विद्यर्थियों ने इन्हीं पंचभूतो के संरक्षण द्वारा मानव जीवन में शान्ति स्थापना का संदेश दिया। 
बच्चों की दुनिया में कार्टून चरित्रों का स्थान सबसे अहम होता है। डिजनी के कार्टून पात्र बच्चो के लिए अनुकरणीय होते हैं। डिज़नी का 'द लाॅयन' एक विश्व प्रसिद्ध कार्टून चरित्र है। डी0 पी0 एस0 किदवई नगर के नन्हे-मुन्ने चलचित्र के इन्हीं प्रिय पात्रों के रूप में जब मंच पर उतरे तो सारा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। 
भारत की संस्कृति कर्म और फल की अवधारणा पर आधारित है। गीता इस अवधारणा की मूल स्त्रोत है। कैसे हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना स्वामित्व सिद्ध करने हेतु कौरव और पाण्डव कुरुक्षेत्र के मैदान में आमने-सामने आ गए ? महाभारत के रूप में प्रसिद्ध इसी ऐतिहासिक गाथा को एक नृत्य नाटिका के द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अद्भुत प्रस्तुति को देखकर सभी भाव-विभोर हो उठे। 
विद्यालय के संस्थापक श्री आलोक मिश्रा ने अपने संबोधन में सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस विश्वास से उन्होंने अपने नौनिहालों को संस्था को सौंपा है हम उनके प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। वार्षिकोत्सव में बच्चों द्वारा किया गया कुशल व श्रेष्ठ प्रदर्शन उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
वर्तमान में सम्पूर्ण संसार संचार माध्यमों के बहुतायत प्रयोग के कारण इनका दास-सा बन गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इनके बिना जीवन ही निरर्थक है। वास्तव में मनोरंजन के साधन कहे जाने वाले इन उपकरणों ने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई परिवार को विघटित व एकाकी बना दिया है। जिसके परिणाम स्वरूप परिवार के बुजुर्ग उपेक्षित व बच्चे अवसाद के शिकार हो गए हैं। मोबाइल फोन के कारण उत्पन्न गंभीर समस्याओं का अहसास कर मानव को इस कुचक्र से बाहर आकर अपने वास्तविक जीवन की ओर उन्मुख होने का संदेश दिया गया। ये उपकरण न केवल व्यक्ति बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के लिए अत्यंत घातक है। मंच से छात्र/छात्राओं ने इसके सदुपयोग का संदेश दिया। 
पर्यावरण, प्रदूषण और प्लास्टिक आज की सबसे गंभीर समस्याएँ हैं। प्लास्टिक ने धरती से लेकर अंतरिक्ष तक को प्रभावित कर दिया है। किदवई नगर ने नौनिहालों ने मंच से इसी समस्या की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करते हुए सभी को भविष्य की भयावहता का प्रत्यक्ष दर्शन कराया। सभी को यह संदेश भी दिया कि इस समस्या का निदान परस्पर सहयोग से ही संभव है।
प्रलय के पश्चात् सृष्टि के पुनर्निमाण हेतु भगवान विष्णु ने अनेक रूपों में अवतार लिया, जिनमें मत्स्य, कूर्म, वराह आदि प्रमुख हैं। डी0 पी0 एस0 किदवई नगर के छात्र/छात्राओं ने 500 वर्ष पुरानी दक्षिण महारराष्ट्र व उत्तरी गोवा के प्रसिद्ध लोक मंच शैली के माध्यम से विष्णु के इन्हीं दशावतारों की प्रत्यक्ष प्रस्तुति से सभी को भक्ति-भाव से अभिभूत कर दिया।
भारत की अखंडता, अस्मिता के रक्षक न्यूनतम तापमान में भी सजग और अटल रहते हैं। ये उनके असीम धैर्य, त्याग व बलिदान के कारण ही संभव है कि सभी देशवासी सुरक्षित व खुशहाल हैं। वार्षिकोत्सव के समापन से पूर्व छात्र/छात्राओं ने मंच से भारत की तीनों सेनाओं के वीरों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा यह षपथ भीली वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से करते हुए देश की स्वतंत्रता व अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हर त्याग व बलिदान हेतु सदैव तत्पर रहेंगे।
संसार में व्याप्त अंधकार अज्ञान व अशिक्षा का ही परिणाम है। इसे दूर करने का एकमात्र उपाय शिक्षा के प्रकाश से ही संभव है। यह प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। जब सब  पढ़ेंगे तभी सब आगे बढ़ेंगे। डी0 पी0 एस0 बर्रा के छात्रों ने एक सुरीले क्वायर के द्वारा शिक्षा के महत्व को प्रस्तुत किया। 
संगीत जीवन की आत्मा है। जिन अहसासों को शब्द कहकर भी नहीं कह पाते संगीत के माध्यम से वे सभी भाव कुछ ही क्षणों में भावों के सागर में उतराने-डूबने लगते हैं। स्कूल के आर्केस्ट्रा व राॅकबैंड ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया जो उनके सतत् अभ्यास, लगन व कर्तव्यनिष्ठा  को दर्शा रहा था।  उनका परस्पर तालमेल देखते ही बनता था
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रबंध समिति के सदस्य श्री देवव्रत मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित कर सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ ही दिल्ली पब्लिक स्कूल बर्रा का वार्षिकोत्सव उमंग 2019' सम्पन्न हुआ।