तन्ज़ीम बरेलवी उलमा-ए-अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतिमाम जश्ने आमदे रसूल का 9वाँ जलसा मस्जिद जरीब चौकी में आयोजित





कानपुर:महफिले मीलाद में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादते बा सआदत का बयान और उसी के जिम्न में आपके फज़ाएल व मोजिज़ात के साथ ही आपकी पाकीज़ा सीरत और हालाते जिन्दगी का जिक्रे जमील होता है, इन चीज़ों का जिक्र क़ुरआने मजीद और अहादीसे करीमा में भी बकसरत मौजूद है। 

अगर मुसलमान अपनी महफिलों में इन मुक़द्दस मज़ामीन को बयान करें बल्कि ख़ास इन्ही बातों को बयान करने के लिये ही महफिलें मुनअकिद करें को भला इसके नाजाएज़ होने में भला क्या वजह हो सकती है?

यक़ीनन एैसी महफिलें जाएज़ ही नहीं बल्कि बाइसे ख़ैर व बरकत होती हैं, एैसी महफिलों के लिये लोगों को बुलाना भलाई की तरफ बुलाना है जो कारे सवाब है इन ख्यालात का इज़हार तन्ज़ीम बरेलवी उलमा-ए-अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतिमाम मस्जिद जरीब चौकी मे हुए जशने आमदे रसूल के नवाँ जलसे मे मदरसा अहसनुल मदारिस क़दीम के प्रिसिंपल हज़रत अल्लामा मुफ्ती शहबाज़ अनवर नूरी ने किया तन्ज़ीम के सदर हाफिज़ व क़ारी सैयद मोहम्मद फैसल जाफरी की सदारत मे हुए जलसे को मौलाना ने आगे कहा कि पैगम्बरे इस्लाम ने मज़हबे इस्लाम का प्रचार अपने इख्लाक़ व किरदार से किया आज जो हम लोगो को दर्स मिला है यह मेरे आक़ा का सदक़ा है उन्होने कहा कि मीलादे पाक की महफिलों में वक़्ते विलादत खड़े होकर सलात व सलाम पढ़ना हमारे अस्लाफ का तरीक़ा है, अरब व अजम में बड़े बड़े उल्मा व मशाएख़ ने इस क़यामे सलात व सलाम को मुस्तहब फरमाया है। 

कुछ अकाबिर औलिया को तो मीलाद शरीफ की महफिल में नबिये पाक अलैहिस्सलाम की जियारत का शर्फ भी हासिल हुआ है। 

इसी तरह हुज़ूर जिसे चाहें अपना जमाले जहाँ आरा दिखाएँ क्यूँकि उनके रब ने उनको हयाते जावेदानी अता फरमाई है और बड़ी बड़ी ताक़तों का बादशाह बल्कि शहंशाह बनाया है इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि जशने चिरागां के मौके पर अपने घरो को सजाए नबी के नाम की मीलाद करें उनके नक्शे क़दम पर चलें मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुहिब रज़ा हबीबी ने कहा कि पैगम्बरे इस्लाम के एक इशारे पर चाँद के दो टुकड़े होना डूबे हुए  सूरज का वापस होना यह भी नबी के मोजिज़ो मे एक मोजिज़ा है इससे पहले जलसे का आगाज़ तिलावते क़ुरान पाक से हाफिज़ गुलाम अहमद रज़ा ने किया और निज़ामत हाफिज़ मोहम्मद तौसीफ रज़ा ने की कारी अब्दुल कादिर,हाफिज़ फुज़ैल अहमद रज़वी,अज़हर नूरी,ज़ीशान रजा,शहबाज़ आलम,मोहम्मद आमिर,मोहम्मद आरिफ ने बारगाहे रिसालत मे नात पाक पेश की जलसा सलातो सलाम व दुआ के साथ खत्म हुआ और शीरनी तकसीम की गई जलसे के बाद दारूल उलूम रज़ाए मुस्तफा के तल्बा जो इम्तिहान मे अच्छे नम्बर लाए उनको ईनाम से नवाज़ा गया इस मौके पर मोहम्मद अनीस बरकाती,अहमद अली बरकाती,मोहम्मद आसिफ (सदर),अहमद खाँ (सचिव),अख्तर हुसैन,मोहम्मद इख्लाक़,हबीब भाई,अज़ीम बकाई,मुन्ना अन्सारी,सैयद शाबान,शाहनवाज़ अन्सारी आदि लोग मौजूद थे।