सीएमओ सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, नवजात शिशु देखभाल सप्ताह 21 नवम्बर तक
कंगारू मदर केयर व स्तनपान को बढ़ावा देने पर जोर

प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 43 प्रति 1000 जीवित जन्म


 

कानपुर , 18 नवम्बर 2019

सोमवार को सीएमओ कार्यालय के सभागार में नवजात शिशु जागरुकता सप्ताह पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नवजात शिशु मृत्यु-दर में कमी लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया। नवजात को असमय मौत से बचाने के लिए, शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाने के लिए ही 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का आयोजन पूरे जनपद में किया जा रहा है। 

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक शुक्ल का कहना है कि इस सप्ताह को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य समुदाय में यह सन्देश पहुँचाना है कि नवजात को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराना, 6 माह के बाद ऊपरी आहार के द्वारा शिशुओं को कुपोषित होने से बचाना, समय से नियमित टीकाकरण कराना है।

न्यूट्रिशन इंटरनेशनल के मण्डलीय परामर्शदाता मनीष ने बताया की कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा देकर भी नवजात को स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सकता है। नवजात की बेहतर देखभाल करने के लिए जनसामान्य को जागरूक करने पर बहुत ही ध्यान देने की जरुरत है। नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत भी इसी बात पर जोर देना है कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किस प्रकार हर वर्ग का सहयोग हासिल कर शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जाए।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ॰ राजेश कटियार के अनुसार यदि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सही पोषण नहीं मिलता है तो उनके होने वाले बच्चे भी कम वजन के पैदा होते है और कुपोषण का शिकार हो जाते है। इसलिए गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक यानि गर्भकाल के 270 दिन और और बच्चे के जन्म के दो साल यानि 730 दिन तक कुल 1000 दिनों तक माँ और बच्चे को सही पोषण मिले तो बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ प्रतिरोधक क्षमता में भी बृद्धि होती है, जो आगे जाकर बच्चे को बीमारियों से बचाता है तथा बच्चा स्वस्थ जीवन व्यतीत करता हैं।

भारत सरकार की ओर से  जारी (एसआरएस-2016) की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 43 प्रति 1000 जीवित जन्म है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक 34 प्रति 1000 जीवित जन्म है। इनमें से तीन चौथाई शिशुओं की मृत्यु जन्म के पहले हफ्ते में ही हो जाती है, जबकि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध दिए जाने से शिशु मृत्यु दर में 20 से 22 फीसद तक की कमी लायी जा सकती है। 

कार्यशाला में जिला अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, परामर्शदाता, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता हरी, डीपीएम, डीसीपीएम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, डीएचईआईओ, चिकित्सा अधीक्षक, संस्था न्यूट्रिशन इंटरनेशनल के जिला समन्वयक, पीएसआई प्रतिनिधि, सीडीपीओ व अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहें।